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पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने झीरम हमले मामले पर NIA की जांच पर सवाल उठाए

अब फैसला 5 सितंबर को आएगा

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी मामले में NIA कोर्ट को आज अपना फैसला सुनाना था और पूरा देश इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. लेकिन विशेष अदालत ने फैसले की तारीख आगे बढ़ा दी है. अब फैसला 5 सितंबर को आएगा.

दरअसल, 12 अगस्त को इस मामले में बहस हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने पहले फैसले के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की थी. लेकिन NIA कोर्ट के स्पेशल जज ने अब फैसले को 5 सितंबर तक टाल दिया है. इस बीच कांग्रेस के संभागीय स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने जगदलपुर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले की जांच और NIA कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है।

उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में उन सभी लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए, जो घटना के समय वहां मौजूद थे। भूपेश बघेल ने दावा किया कि झीरम घाटी मामले में जिस आपराधिक और राजनीतिक षड्यंत्र की जांच होनी चाहिए थी, वह पूरी तरह सामने नहीं आ सकी। उन्होंने इसे विशुद्ध रूप से राजनीतिक और आपराधिक साजिश बताते हुए कहा कि जांच में इस पहलू पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि NIA की विशेष अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान गुडसा उसेंडी समेत कुछ ऐसे लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे घटना से जुड़े रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश की जेलों में बंद कुछ नक्सलियों से भी पूछताछ या उनके बयान दर्ज नहीं किए गए। श्री बघेल के मुताबिक, जब जांच के दौरान मामले से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों के बयान ही सामने नहीं आए तो जांच की पूर्णता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह उम्मीद करना मुश्किल है कि पूरे घटनाक्रम और कथित साजिश की वास्तविक तस्वीर सामने आ पाएगी।

भूपेश बघेल ने कहा कि अदालत के सामने जांच एजेंसी की ओर से जो रिपोर्ट और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं, न्यायालय उसी के आधार पर अपना फैसला सुनाएगा। लेकिन उनका आरोप है कि जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल ही नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि 25 मई 2013 को हुई झीरम घाटी की घटना को लेकर कांग्रेस और आम जनता लंबे समय से पूरी सच्चाई सामने आने और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद कर रही है। हालांकि, वर्तमान जांच प्रक्रिया को देखते हुए उन्हें अदालत के फैसले से उस तरह की उम्मीद नहीं है, जैसी कांग्रेस और पीड़ित परिवारों की रही है।

गौरतलब है कि झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है और मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान ने एक बार फिर झीरम कांड की जांच और कथित राजनीतिक साजिश के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

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